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आस्था पर चोट! श्रीराम-कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले सपा नेता को जमानत, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत; VIDEO

 Published : Mar 31, 2026 07:26 am IST,  Updated : Mar 31, 2026 07:26 am IST

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले सपा नेता यदुनंदन लाल वर्मा का भीम आर्मी ने भव्य स्वागत किया। दो दिन पहले वायरल हुए विवादित वीडियो ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया था।

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सपा नेता यदुनंदन लाल वर्मा ने भगवान राम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी की थी। Image Source : REPORTER INPUT

हरदोई: भगवान श्रीराम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले समाजवादी पार्टी नेता यदुनंदन लाल वर्मा को जमानत मिल गई है। जेल से रिहा होने के बाद हरदोई में यदुनंदन के समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सड़क पर नारेबाजी करते हुए यदुनंदन लाल वर्मा का स्वागत किया। इस दौरान भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। इस घटना के बाद इलाके में तनाव है।

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि 2 दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें यदुनंदन लाल वर्मा ने भगवान श्रीराम और माता कौशल्या पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यदुनंदन लाल का विवादित वीडियो सामने आने के बाद इसको लेकर चर्चा तेज हो गई। जिस पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया था। 

पूरा मामला हरदोई जिले के सांडी थाना इलाके में अंटवा खेरवा गांव का है। गांव में गुरुवार को सम्राट अशोक की जयंती पर संजय कुशवाहा की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में कई दलों के नेताओं की मौजूदगी रही। इसी कार्यक्रम के दौरान सपा नेता यदुनंदन लाल वर्मा का भाषण रामनवमी वाले दिन सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और अब उनके स्वागत का वीडियो सामने आया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा स्वागत वीडियो-

हरदोई की सार्वजनिक सभा में इस प्रकार का मामला सामने आने के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया। हालांकि जमानत मिलने के बाद खुलेआम स्वागत किए जाने पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

यह स्वागत केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हिंदू आस्था और सामाजिक मर्यादा पर खुले तौर पर चोट है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन ने इस आयोजन के लिए अनुमति कैसे दी? क्या कानून और संवेदनशील धार्मिक भावनाओं के बीच कोई संतुलन रखा गया,या इसे राजनीतिक नुमाइश माना गया? अगर अनुमति नहीं थी, तो प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

ईश्वर का अपमान करने वाले का खुलेआम स्वागत

यह घटनाक्रम साफ करता है कि समाज और राजनीति में धार्मिक जिम्मेदारी और मर्यादा अब किनारे रख दी गई है। ईश्वर का अपमान करने वाले का खुलेआम स्वागत, नारेबाजी और जुलूस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। अब प्रशासन और समाज के लिए चुनौती यह है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और कार्रवाई कब तक दिखाते हैं। यह केवल टिप्पणी का मामला नहीं,बल्कि धार्मिक भावनाओं और जिम्मेदार राजनीतिक व्यवहार के बीच सीधा टकराव बन गया है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

(रिपोर्ट- राम श्रीवास्तव)

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